पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर शनिवार को बार एसोसिएशन मवाना, मवाना सिविल बार एसोसिएशन, दस्तावेज लेखक संघ और टाइपिस्ट संघ के संयुक्त तत्वावधान में विरोध प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ताओं ने अपने चैंबर बंद रखे और रजिस्ट्री कार्यालय में तालाबंदी कर कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया। और सभी ने राज्यपाल के लिए मवाना उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सोपा l*आम सभा में लिया गया सर्वसम्मति से निर्णय*शनिवार सुबह 10 बजे आयोजित आम सभा की अध्यक्षता संयुक्त रूप से श्रीबल्लभ एडवोकेट, राजेंद्र तोमर एडवोकेट, सुनील दीक्षित और कमल रस्तौगी ने की, जबकि संचालन महमपाल सिंह एडवोकेट और नटवर राणा एडवोकेट ने किया। सभा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित किए जाने की वर्षों पुरानी मांग पर विस्तार से चर्चा की गई।*50 वर्षों से जारी आंदोलन को और प्रभावी बनाने का ऐलान*सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय संघर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों एवं तहसील बार एसोसिएशनों में प्रत्येक शनिवार को होने वाली हड़ताल का सख्ती से पालन किया जाएगा तथा रजिस्ट्री कार्यालय में किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।*रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन*निर्णय के अनुसार संयुक्त बार एसोसिएशन मवाना के अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और टाइपिस्टों ने अपने-अपने चैंबर बंद रखे तथा रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ की शीघ्र स्थापना की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि खंडपीठ की स्थापना होने से क्षेत्र के लाखों लोगों को न्याय प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी।
