मेरठ, 30 जनवरी 2026: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जोन B2, मोदीपुरम पॉकेट A, लावड़ रोड पर भ्रष्ट अभियंता प्रमोद वर्मा के संरक्षण में बिल्डर दीपक धवन द्वारा 800 गज से अधिक क्षेत्र में कमर्शियल फ्लैटों की अवैध बिल्डिंग का निर्माण जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, यह निर्माण पूरी तरह नियम-विरुद्ध है, फिर भी एमडीए के उच्च अधिकारी कार्रवाई के नाम पर मौन साधे बैठे हैं।अवैध निर्माण की यह इमारत पहले ही पहली मंजिल तक पहुंच चुकी है, और प्रमोद वर्मा की मिलीभगत से इसे रोकने का कोई इरादा नहीं दिख रहा। दीपक धवन का यह पुराना इतिहास रहा है—मोदीपुरम रोड पर पहले भी कई अवैध फ्लैटों का निर्माण कर चुके हैं, हर बार एमडीए अधिकारियों से ‘सेटिंग’ कर काम पूरा कर लिया। मवाना कोर्ट के पास भी प्रमोद वर्मा ने आधा दर्जन अवैध निर्माण और करीब 500 दुकानों वाली मार्केट को हरी झंडी दे दी, जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।प्रमोद वर्मा का काला कारनामा: सेटिंग का जालमुख्य आरोप: प्रमोद वर्मा ने दीपक धवन को खुली छूट दी है, जिससे जोन B2 में और भी अवैध कमर्शियल निर्माण पनप रहे हैं।पिछले मामले: मवाना क्षेत्र में दर्जनों अवैध प्लॉट और बाजार उनके इशारे पर बने, बिना किसी जांच के।सरकारी नुकसान: नियम तोड़कर करोड़ों का राजस्व लुटा, जबकि एमडीए कर्मचारी हर निर्माण पर ‘कमीशन’ वसूल रहे।उच्च अधिकारियों की चुप्पी: उपाध्यक्ष संजय मीणा के नेतृत्व में कोई सख्ती नहीं, भ्रष्टाचार फल-फूल रहा।सूत्र बताते हैं कि एमडीए के कई कर्मचारी इसी तरह सेटिंग के जाल में फंसे हैं, और जोन B2 अवैध निर्माणों का हॉटस्पॉट बन चुका है। प्रमोद वर्मा जैसे अभियंताओं की वजह से आम नागरिकों को सस्ते फ्लैटों का सपना टूट रहा है, जबकि सरकारी खजाना खाली हो रहा।क्या होगी कार्रवाई? उपाध्यक्ष संजय मीणा पर सबकी नजरेंअब सवाल यह है कि एमडीए उपाध्यक्ष संजय मीणा इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएंगे या नहीं? प्रमोद वर्मा के खिलाफ जांच और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने के आदेश देंगे, या निर्माणकर्ताओं को संरक्षण देते रहेंगे? स्थानीय निवासियों में रोष है, और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाता जा रहा। एमडीए से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग तेज हो गई है।यह खुलासा एमडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। क्या भ्रष्टाचार पर अब भी आंखें बंद रहेंगी?
