रिपोर्ट लोकेश कुमार।
मेरठ, आवास विकास परिषद मेरठ में जेई .(अब प्रमोट होकर अधिकारी बने) अजब सिंह की कार्यशैली इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर सेंट्रल मार्केट के कॉम्पलेक्स में हर दुकान पर ध्वस्तीकरण (तोड़फोड़) के साथ बिजली पानी बंद के नोटिस चस्पा कर दिए गए, वहीं दूसरी ओर उनके प्रमोशन के बाद जो “गजब की कार्यवाही” सामने आई है, उसने सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवैध निर्माण पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति
अजब सिंह द्वारा सेक्टर 1 से लेकर सेक्टर 6 तक अवैध रूप से बन रहे दर्जनों निर्माण स्थलों पर नोटिस चस्पा कर “कार्रवाई” की खानापूर्ति की गई। मगर इन नोटिसों का कोई असर न तो निर्माणकर्ताओं पर पड़ा और न ही विभाग की तरफ से आगे कोई सख्त कदम उठाया गया। कई स्थानों पर तो निर्माणकर्ताओं ने नोटिसों को फाड़कर फेंक दिया – जिससे साफ जाहिर होता है कि उनमे न प्रशासन का खौफ है, न नियमों का पालन।
2/1 शास्त्री नगर का मामला – एक माह में कोई कार्रवाई नहीं
2/1 शास्त्री नगर का उदाहरण सबसे ताज़ा और साफ है, जहाँ करीब एक महीने पहले निर्माण पर नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन आज तक वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई। निर्माण कार्य पहले की तरह जारी रहा, 649/6 पर नोटिस चस्पा हुआ लेकिन निर्माण कर्ता ने नोटिस फाड़कर फेंक दिया, 762/2 शास्त्री नगर मे चार मंजिला मकान बिना नक़्शे के बन गया और जिम्मेदार अधिकारी खामोश बैठे हैं।
क्षेत्र मे चल रहे दर्जनों निर्माण पर कार्यवाही शून्य:
( विभाग पर सवाल )
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग की यह निष्क्रियता अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है। कई जगह बिना नक्शा पास कराए या मानकों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य हो रहा है। लेकिन अधिकारी सिर्फ कागजों में नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं।
क्या है अंदरूनी वजह?
सूत्रों के मुताबिक, प्रमोशन के बाद अजब सिंह केवल दिखावे के लिए कार्रवाई कर रहे हैं ताकि रिकॉर्ड में उनका काम दिखे, लेकिन असल में जमीन पर कुछ नहीं हो रहा। ये भी आशंका जताई जा रही है कि कुछ मामलों में अधिकारियों और बिल्डरों के बीच अंदरूनी मिलीभगत हो सकती है।
( सवाल उठता है:)
क्या मेरठ आवास विकास परिषद इस तरह की ढील बरतते हुए कानून व्यवस्था बनाए रख पाएगी?
क्या अजब सिंह जैसे अधिकारियों पर कोई निगरानी नहीं है?
क्या अवैध निर्माण पर सिर्फ खानापूर्ति ही होती रहेगी?
जनता और स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में सजग होने की जरूरत है, वरना आने वाले समय में मेरठ जैसे शहरों का नक्शा पूरी तरह से अवैध निर्माणों से भर जाएगा। कुछ निर्माण जिनपर नहीं हुई कार्यवाही : (1) आवास विकास ऑफिस से पहले चौराहे बन बने बॉक्सी पार्क पर रहे आवास विकास अधिकारी मेहरबान! यही व्यवस्था आज से 30 साल पहले थी अगर सेन्ट्रल मार्किट बनते समय अधिकारियो द्वारा सिर्फ नोटिस नोटिस का खेल न किया होता तो आज इतनी मशक्कत न करनी पडती!
