ललिता गौतम हत्याकांड के बाद पुलिस कार्रवाई पर फिर गरमाया विवाद, किसान नेता को हिरासत में लेकर मारपीट:

ललिता गौतम हत्याकांड के बाद पुलिस कार्रवाई पर फिर गरमाया विवाद, किसान नेता को हिरासत में लेकर मारपीट:

मेरठ। ललिता गौतम हत्याकांड के बाद हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। किसान नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ कथित मारपीट और यातना दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।किसान नेताओं का आरोप है कि उन्हें मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के कार्यालय बुलाया गया था, जहां कथित तौर पर उनके साथ करीब डेढ़ घंटे तक मारपीट की गई। आरोप है कि इसके बाद दोनों को SOG कार्यालय ले जाया गया, जहां भी उनके साथ कथित रूप से बर्बरता की गई।दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर पैर बांधकर पीटने तथा शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर लाठी-डंडों से मारने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान नेताओं का दावा है कि मुलाकात के दौरान उनके शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दिए। दिग्विजय भाटी की आंख के आसपास सूजन और चोट का निशान होने की बात भी सामने आई है।यह पूरा मामला ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के कथित थप्पड़ का वीडियो भी सामने आया था।अब किसान नेताओं द्वारा लगाए गए नए आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में कथित व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हिरासत के दौरान वास्तव में मारपीट हुई थी या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो इसकी भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।फिलहाल ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़ा यह विवाद पुलिस कार्रवाई, हिरासत में व्यवहार और मानवाधिकार के सवालों को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

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