रिपोर्ट लोकेश कुमार।
मेरठ 30 से 35 साल की मेहनत और अब सड़को पर आने की नौबत लेकिन इनके जिम्मेदार कहा है! इसका जवाब किसी के पास नहीं है! सेन्ट्रल मार्किट जो कभी आबूलेन की चका चौन्ध को भी फीका करता था आज टूटने की कगार पर नजर आ रहा है! लेकिन क्या इसके जिम्मेदार सिर्फ दुकानदार है! वो अफसर नहीं जिसकी देखरेख मे इन्हे बनाया गया! आज के समय मे शायद ही कोई गाली मोहल्ला हो जिसमे दुकाने न बनी हो! लेकिन ज़ब ये बन रही थी तब किसी का ध्यान नहीं है और गया तो सबके पास लिफाफा पहुँचते ही आँख बंद कर ली गई! सहायक कर्मचारी मुमताज़ जो निर्माण कार्य या दुकान बननी शुरू होते ही वहां पहुँच जाते थे कार्यवाही करने नहीं उन्हें अधिकारियो का भय बता कर अपनी जेब गर्म करने! अब बात की जाये आज की तो समय बदला है अधिकारी बदले है लेकिन आज भी आवास विकास अधिकारियो की नाक के नीचे अवैध निर्माण तैयार किये जा रहे है लेकिन अधिकारी उन्हें रोकने की बजाय उन्हें संरक्षण देते है! और अगर कोई निर्माण अगर समाचार पत्र मे प्रकाशित किया जाता है तो उसपर कार्यवाही करने की बजाये आवास विकास मे बैठे अधिकारी अजब सिंह निर्माण करता को उनका नम्बर दे देते है! ताकि उनकी मर्यादा बनी रहे!
