रिपोर्ट तरुण आहुजा।
कथा के मंच पर संस्कार, पर पीछे होती मनमानी: पूर्व पार्षद की दबंगई का मामला उजागर: मेरठ! जागृति बिहार में आयोजित पांच दिवसीय हनुमान कथा में एक ओर जहां आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री जी संस्कार और धर्म का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कथा स्थल के आसपास कुछ लोग अपनी धाक जमाने में लगे हुए हैं। मामला वार्ड 21 की पार्षद बबीता खन्ना के पति से जुड़ा है, जो स्वयं पूर्व पार्षद रह चुके हैं। हालांकि, अब उनका पद नहीं है, फिर भी वे खुद को पार्षद बताने से नहीं चूकते।पूर्व पार्षद की धाक और नियमों की अवहेलनाजानकारी के अनुसार, हनुमान कथा के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा कई नियम लागू किए गए हैं, जिनका पालन आवश्यक है। इनमें एक महत्वपूर्ण नियम है कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, कथा स्थल के पास लगे फास्ट फूड स्टॉल्स पर खुलकर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल खुलकर हो रहा है।चश्मदीदों ने बताया कि पूर्व पार्षद के प्रभाव के चलते न केवल नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, बल्कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई से भी बचा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब एक ओर कथा में धर्म और आचार-विचार की शिक्षा दी जा रही है, तब दूसरी ओर नियमों की धज्जियां उड़ाना दुर्भाग्यपूर्ण है।प्रशासन की भूमिका और लापरवाहीस्थानीय प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किसके दबाव में इस तरह के नियमों की अनदेखी की जा रही है। सरकार द्वारा साफ निर्देश दिए गए हैं कि व्यावसायिक गतिविधियों में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग करना गैरकानूनी है। इसके बावजूद, किसी भी प्रकार की जांच या कार्रवाई न होना प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है।सुरक्षा और जनहित की अनदेखीघरेलू सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत खतरनाक है। ऐसे सिलेंडरों से गैस लीक होने की संभावना बनी रहती है, जिससे आगजनी जैसी घटनाएं हो सकती हैं। धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं, ऐसे में सिलेंडर विस्फोट की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।स्थानीय लोगों की मांगकई स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजन के नाम पर कानून का मखौल उड़ाना अनुचित है। पूर्व पार्षद द्वारा प्रभाव जमाकर नियमों की अवहेलना करना जनता के बीच गलत संदेश देता है।अगर प्रशासन इस पर सख्त कदम नहीं उठाता, तो यह अन्य लोगों को भी नियम तोड़ने का प्रोत्साहन देगा।निष्कर्षकथा स्थल पर जहां धर्म और संस्कारों की शिक्षा दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर सामने आ रही है। अब यह देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और किस प्रकार नियमों के पालन को सुनिश्चित करता है।
