रिपोर्ट अमित कांबोज।
मध्य गंग नहर पटरी की हालत जर्जर, पथरीले रास्तों से गुजरना होगा कठिन शिव भक्तों की होगी कठिन परीक्षा ।
अमित कम्बोज मवाना, संवाददाता। आने वाली फाल्गुन मास की शिव शिवरात्रि को होगी कांवड़ियों की कठिन परीक्षा नहर की पटरी की हालत हुई झांझर अधिकारी मौन बैठे हैं l आनेवाली 26 फरवरी को फाल्गुन मास की के लिए गौमुख, गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि पवित्र स्थानों से लाखों, हजारों की संख्या में शिवभक्त कांवड़िए पवित्र गंगाजल लेकर गंगनर पटरी से होते हुए अपने अपने गंतव्य ओर जायेंगे लेकिनमवाना गंगनहर पटरी की स्थिति दयनीय हो चली है। लेकिन शिव भक्तों की राहे पथरीली होने के चलते जिम्मेदारों के द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है। बता दे की उत्तराखंड के विभिन्न धार्मिक स्थलों से गंगाजल लेकर लाखों, हजारों शिवभक्त कांवड़िए अपने आराध्य देव भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए पवित्र गंगाजल लेकर अपने अपने शिवालयों की और बढ़ते हैं तथा तय समय में भगवान का जलाभिषेक कर अपनी यात्रा संपूर्ण करते हैं। इसी क्रम में हरिद्वार के मंगलौर से होकर जोली होते हुए मवाना गंगनहर पटरी से मवाना होते हुए शिवभक्त कांवड़िए अलीगढ़, बुलंदशहर, सिंभावली, गुलाव टी, आहर, हापुड़, किठौर, परीक्षितगढ़ आदि स्थानों पर जाते हैं। प्रत्येक वर्ष के श्रावण व फाल्गुन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि व महाशिवरात्रि पर्व पर इसी मार्ग से होकर हजारों लाखों कांवड़िए गुजरते है। लेकिन इस वर्ष सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण से गंगनहर पटरी जगह जगह खस्ताहाल हो चली है। जहां तहां गंगनहर पटरी उखड़ी पड़ी है तथा नुकीले पत्थर शिवभक्त कांवड़ियों के राह की बाधा बन सकते हैं तथा शिव भक्तों को पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ेगा। जिससे ये साफ हो चला है कि शिवभक्त कांवड़ियों की राह आसान नहीं होने वाली है तथा इस बार की यात्रा कठिन हो सकती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार बताया गया कि फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि श्रावण मास शिवरात्रि से अधिक महत्व रखती है। वही शिव भक्तों की सेवा में भंडारा लगाने वाले धर्म प्रेमियों ने गंग नहर पटरी पर भंडारा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने भोले के भक्तों की राह आसान करने के लिए कोई उपाय नहीं किया है।
