रिपोर्ट अमित कांबोज।
योगीराज में अवैध कॉलोनीयो मे भराव के लिए हो रहा है खनन • मवाना से किला परीक्षित रोड पर बना रही है अवैध कॉलोनी • सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हो रही है अवहेलना • रात भर सड़कों पर दौड़ रहे मिट्टी से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली व हाईवे • राजस्व पर पढ़ रही है मार • क्या शासन प्रशासन की मिली भगत से खड़ी हो रही है अवैध कालोनियां ? • अवैध कॉलोनी को लेकर आखिर क्यों चुप्पी साधे हैं एमडीए ? • आखिर क्यों नहीं दिखते हैं अधिकारियों को यमदूत बने हाईवे व डंपर? संवाददाता मवाना योगी सरकार व सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों को देखते हुए अवैध कालोनियां व खनन पर सख्त पाबंदियों के बावजूद आखिर क्यों शासन प्रशासन नियमों की उड़ रही है धज्जियां l यूं तो मिट्टी खनन प्रतिबंधित हैं बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तमाम तरह के खननो को रोकने के आदेश जारी किए। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते खनन माफिया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की बेखौफ धज्जियां उड़ाने में मगन हैं। और उधर अवैध कॉलोनी के निर्माण में एमडीए भी पीछे नहीं है l जो अवैध कॉलोनी के धस्तीकरण को लेकर खाना पूर्ति करके वापस चली जाती है l आज मवाना तहसील क्षेत्र अवैध कॉलोनी का हब बन चुका है जहां पहले हरे भरे बाग हुआ करते थे किसानों के खेत हुआ करते थे आज वहां पर अवैध कॉलोनी का निर्माण हो चुका है यह खेल शासन प्रशासन व एमडीए के कुछ अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा सेटिंग गेटिंग के अंतर्गत चल रहा है l और उन अवैध कॉलोनी में भराव हेतु शाम ढलते ही मिट्टी खनन जोरो से शुरू हो जाता है। और पूरी रात अवैध हाईवे वह ट्रैक्टर ट्राली के द्वारा उन अवैध कॉलोनीयो में भराव कर दिया जाता है l कॉलोनी नाइजर की सेटिंग इतनी जबर्दस्त होती है की कॉलोनी के नक्शे बनने से लेकर भराव, सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था, बाउंड्री वॉल, और कॉलोनी के प्लॉट बिकने तक शासन प्रशासन को ना कुछ दिखता है ना ना ही सुनता है और ना ही बोलता हैl और इसलिए कॉलोनाइजर कायदे कानून को ताक पर रखकर चांदी ही चांदी काट रहे हैं सुनने में तो यह भी आता है की इन कॉलोनी नजरों के पीछे किसी सत्ताधारी सफेदपोश नेता का हाथ है l हालात इतने गंभीर बने हुए हैं l अगर कोई भी शासन और प्रशासन को फोन कर अवैध कालोनियां व खनन की सूचना भी देता है अव्वल तो फोन उठाता ही नहीं l अगर कोई अधिकारी फोन उठा भी ले तो सिर्फ तसल्ली मिलती है बता दें कि देशभर में बढ़ रहे प्रदूषण केसर को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने खनन और उनसे जुड़े कार्यों पर रोक लगा रखी है। लेकिन क्षेत्र के खनन माफिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बता कर मवाना क्षेत्र की चारों दिशाओं में बसें गांव के जंगल में रात के अंधेरे में जेसीबी का पीला पंजा जामकर खनन करता है। सूचना के बाद भी प्रशासनिक अमला खनन माफिया पर कार्रवाई करने से बचता नजर आता है। • जानकारी के बाद भी नहीं होती करवाई सूत्रों की माने तो रात में गरजने वाले पीले पंजे की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार दी जाती है इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। सरकारी मिट्टी का भी हो रहा खनन यूं तो पुलिस प्रशासन और वन विभाग रात में ग्रस्त करने का दावा करते हैं लेकिन इसके बाद भी वन आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मध्य गंग नहर की सफाई के दौरान निकाली गई मिट्टी खनन माफियाओं की भेंट चढ़ गई। खनन माफियाओं द्वारा वन विभाग की नाक के नीचे किए गए खनन से राजस्व को लाखो रुपए का चूना लगा। लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
