अवैध निर्माण को आवासीय बताते हैं आवास विकास अधिकारी, नोटिस नोटिस का खेल दिखा कर कर देते हैं टाइम पूरा: मेरठ! 1 अप्रैल 2025
मेरठ के आवास विकास क्षेत्रों में तेजी से अवैध निर्माण बढ़ते जा रहे हैं। कई स्थानों पर व्यावसायिक निर्माण को आवासीय बताकर बचाव किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
2 अप्रैल 2025
शास्त्री नगर, गंगानगर और जागृति विहार जैसे इलाकों में कई ऐसे निर्माण सामने आए हैं, जहां पर बहुमंजिला इमारतें और दुकानें बनी हैं, लेकिन कागजों में उन्हें ‘आवासीय भवन’ दिखाया गया है। स्थानीय आरडब्ल्यूए ने आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं।
3 अप्रैल 2025
आवास विकास परिषद के कुछ अधिकारियों से जब इस बारे में जवाब माँगा गया, तो उन्होंने कहा कि “हमने सभी संबंधित व्यक्तियों को नोटिस भेज दिए हैं।” मगर जमीनी हकीकत ये है कि नोटिस केवल दिखावे के लिए दिए जाते हैं और किसी भी निर्माण पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।
4 अप्रैल 2025
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद बिल्डरों और मालिकों को पर्याप्त समय मिल जाता है कि वे या तो निर्माण पूरा कर लें या प्रभावशाली संपर्कों से मामला रफा-दफा कर दें। इस प्रक्रिया को लोग “नोटिस का खेल” कह रहे हैं, जहाँ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है।
5 अप्रैल 2025
एक स्थानीय वकील ने बताया कि “अगर वाकई प्रशासन अवैध निर्माण रोकना चाहता, तो नोटिस की जगह सीधे कार्रवाई की जाती। परन्तु जानबूझकर समय खींचा जाता है ताकि निर्माण पूरा हो जाए और फिर उसे ‘बन चुका है’ कहकर छोड़ दिया जाए।”
6 अप्रैल 2025
शहर के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा और सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा है जिसमें जमीन माफिया, अधिकारी और कुछ स्थानीय नेता शामिल हैं।
मेरठ के आवास विकास क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर के अवैध निर्माण को वैधता देने का खेल चल रहा है। ‘नोटिस’ के नाम पर समय खींच कर निर्माण को पूरा कराया जा रहा है और बाद में उस पर कोई कार्यवाही नहीं होती। यह न केवल कानून का मज़ाक है बल्कि शहर की योजना और विकास प्रणाली के लिए भी खतरा है।
