मिले अंबेडकर-अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष’ – राजरतन अंबेडकर के नारे ने गरमाई यूपी की सियासत :

मिले अंबेडकर-अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष’ – राजरतन अंबेडकर के नारे ने गरमाई यूपी की सियासत :

लखनऊ, 1 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के प्रपौत्र राजरतन अंबेडकर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। मुलाकात के दौरान राजरतन ने एक तीखा नारा दिया- ‘मिले अंबेडकर और अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष’। उन्होंने कहा कि श्रीराम की हवा उड़ने के बाद साधुओं का असली चेहरा सामने आएगा।नारे का तात्पर्य और छिपा संदेशयह नारा साफ तौर पर भाजपा और उसके हिंदूवादी समर्थकों पर हमला बोलता है। ‘साधुओं के भेष’ से तात्पर्य उन धार्मिक नेताओं या संगठनों से है जो भगवा वेश धारण कर राजनीति करते हैं, लेकिन वास्तव में सत्ता के भूखे हैं। राजरतन का इशारा राम मंदिर आंदोलन या हिंदुत्व की राजनीति की ओर है, जहां ‘श्रीराम की हवा उड़ गई’ कहकर वे दावा कर रहे हैं कि भाजपा का राम-नाम आधारित वोट बैंक अब कमजोर पड़ रहा है। अंबेडकर और अखिलेश के गठबंधन से दलित-मुस्लिम-पिछड़े वोट एकजुट होकर भाजपा के ‘साधु भेष’ वाले नेताओं की पोल खोल देंगे।राजनीतिक संदर्भयह मुलाकात एसपी को दलित समर्थन मजबूत करने की कोशिश दिखाती है। अखिलेश यादव पहले ही पसमांदा मुस्लिम और दलित कार्ड खेल चुके हैं, और अंबेडकर परिवार का साथ मिलना भाजपा के लिए चुनौती है। विपक्षी दलों का मानना है कि यह गठबंधन 2027 चुनाव में यूपी की सियासत बदल सकता है। भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पार्टी नेता इसे ‘वोट की राजनीति’ बता रहे हैं।राजरतन अंबेडकर ने मुलाकात के बाद कहा, “अंबेडकरवाद और समाजवाद का मेल ही सच्ची समानता लाएगा। साधुओं का भेष उतर जाएगा।”

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