मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने शहर में सड़कों का चौड़ीकरण, चौराहों का सुधार, और बेहतर ट्रैफिक को अधिशासी अभियंता उस बजट को ठिकाने लगाने में लगा है जिनकी हर तरफ भ्रष्टचार की बात हो रही है। इन प्रयासों से शहर की सुंदरता तो बढ़ी है, लेकिन इस विकास की चकाचौंध के बीच एक गंभीर समस्या उभरकर सामने आई है, जिस पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी है—वह है लोहियनगर की सिद्धार्थ एंक्लेव कॉलोनी की सार्वजनिक पार्कों की बदहाली। लोहियानगर के सिद्धार्थ एंक्लेव के स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक तरफ जहाँ बड़े प्रोजेक्ट्स पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वहीं लोगों के लिए सबसे ज़रूरी खुली जगहें— एक एक मीटर लंबी घास फूंस बढ़ गई हे जहां पर सांप जैसे जहरीले कीड़े मकोड़े पैदा हो गए हैं यानी अधिशासी अभियंता के संरक्षण में पार्क—उपेक्षित रह गए हैं पार्कों को लेकर मेडा के उपाध्यक्ष संजय मीणा मोन क्यों ।और यहीं से भ्रष्टाचार की बू आती है। निवासियों का आरोप है कि MDA ने लोगों से झूठ बोलकर उनकी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ किया है। कॉलोनी में सौंदर्यीकरण के नाम पर आवंटित बजट को भ्रष्ट संपत्ति अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने हड़प लिया है। पार्क के रखरखाव के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के बजट को इन अधिकारियों ने गबन कर लिया है।आज आलम यह है कि कई कॉलोनियों के पार्कों में गंदगी का अंबार है, घास बेतरतीब ढंग से बढ़ी हुई है, पार्क में सौन्दिकरण के लिए ना तो सफाई की व्यवस्थाएं हे और नहीं बेंचों व झूलों लगे हैं। शाम को वॉक करने वाले बुजुर्गों, योग करने वालों, और खेलने वाले बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ जगह नहीं मिल पा रही है बल्कि वहां घास फूस में सांप कीड़े छिपकली जैसे जहरीले कीट घूमते फिरते हैं जहां पर बच्चे भी घूमते हे जहां पर बजट को लेकर अधिशासी अभियंता बजट को खाने मे लगे हैं।स्वस्थ शहरी जीवन के लिए पार्क अत्यंत आवश्यक हैं। MDA को चाहिए कि वह केवल ऊपरी सौंदर्यीकरण पर ही नहीं, बल्कि इन पार्कों के रखरखाव और नियमित साफ़-सफ़ाई पर भी समान रूप से ध्यान दे, ताकि यह विकास भ्रष्टाचार मुक्त हो और आम जनता के जीवन की गुणवत्ता को भी सही मायने में बढ़ा सके।
