, मेरठ! सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद यह तो तय था कि देर सवेर सेंट्रल मार्केट की बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण होगा! लेकिन जो डुब रहा होता है वो आख़री वक्त तक किनारे पर पहुंचने की
जद्दोजहद नहीं छोड़ता। ऐसा ही 661/6 बिल्डिंग के व्यापारी भी कर रहे थे। उन्होंने कोई भी दर ऐसा नहीं छोड़ा, जहां रोटी रोजगार को बचाने के लिए कोशिश न की हो। हर जगह से दिलासा ही मिला दिलासा देने वालों में सिर्फ और सिर्फ भाजपा के नेता ही नहीं व्यपारी और अन्य पार्टी के नेता भी थे।
कई ऐसे भी व्यपारी और नेता भी थे, जो कहते थे कि जब तक वो हैं, जब तक यह महफूज है। ध्वस्त करना तो दूर की बात कोई
अफसर इसको छू तक नहीं सकता। इसके लिए वो राजनीति की चाश्नी में डूबे हुए तमाम भरोसे इन व्यापारियों को दिलाया करते थे। इन नेताओं में कुछ ऐसे भी थे, जो व्यापारियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ में मंत्रियों से मिलवाने भी पहुंचे। वहां से लौटकर मीडिया के सामने दावे किए गए कि कुछ नहीं होगा
बिल्डिंग बिल्डिंग नहीं गिरेगी। फला मंत्री से बात हो गयी है.. सूबे के सरकार के अमुकमंत्री ने कह दिया है कि सीएम से बात करेंगे। इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी। ऐसे
किसी को उजड़ने दिया जा सकता। ऐसे लच्छेदार आश्वासनों के भरोसे बिल्डिंग के व्यापारी भी मुतमईन थे कि अब तो मंत्री ने भरोसा दे दिया है, कुछ होने वाला नहीं वक्त गुजरता गया और वक्त के गुजरने के साथ एक-एक रात इस बिल्डिंग के व्यापारियों पर भी भारी गुजरती थी। ना दिन
को चैन था ना रात में करार बस एक ही बात जहन में रहती कुछ ना हुआ तो क्या होगा। क्या बिल्डिंग को गिरते हुए अपनी बर्बादी का तमाशा खुद देखना होगा और फिर हुआ भी वैसा ही, शनिवार का दिन इस बिल्डिंग के
व्यापारियों पर बुरा गुजरा आवास विकास और पुलिस प्रशासन के अफसर लावलश्कर
के साथ बिल्डिंग को ध्वस्त करने पहुंच गए। ऐसे तमाम व्यापारी इस बिल्डिंग के सामने मौजूद थे, जो अपनी बर्बादी का तमाशा देखने आए थे। फोर्स ने आते ही उन्हें जब धकेलना शुरू किया तो आंखें भीग गई। ये वो वक्त था,
जब उन्हें उनकी जरूरत थी जो बड़े बड़े दावे किया करते थे कि कुछ नहीं होने देंगे।लेकिन उनके साथ कोई नहीं था! सत्यम को न्याय दिलाने सड़कों पर उतरने वाले माननीय ने सेंट्रल मार्केट से किया किनारा: सेन्ट्रल मार्किट के व्यपारियों ने बताया कि सिर्फ लक्ष्मीकांत बाजपेयी जी को छोड़कर हमारे सहयोग मे कोई नहीं रहा अंतिम समय मे हमारे फोन तक नहीं उठे! कुछ ने तो अपने किसी सहयोगी को फोन देकर ये कहलवा दिया कि वो बाहर हैँ!
