परीक्षितगढ़ के डॉ गजे सिंह भवन में किया गया समिति अध्यक्ष विष्णु अवतार रुहेला ने कहा कि अगर बेटे घर का चिराग है तो बेटियों से घर रोशन होता है जिस घर में बेटिया न हो वहां अब कुछ होते हुए भी कमी सी लगती है कथा के वर्णन करते हुए कथा वाचक योगेश नंदनी ने बताया कि एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी एक दिन बेटी अपनी भाभियों के साथ मिट्टी लेने जी गलती से बेटी की कुदाली से सेही की बच्चे में गए जिसके शाप के कारण साहूकार के साथ बच्चे एक एक कर मर गए साहूकार और पत्नी दोनों गंगा किनारे गए और मूर्छित हो गए तो मां लक्ष्मी ने दर्शन दिए और बताया कि गौ सेवा करने से तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी दोनों पति पत्नी गौ की सेवा करते हैं जिससे साहूकार को पुनः पुत्र प्राप्त हुए इससे पूर्व श्री गणेश लक्ष्मी का पूजन किया गया समिति के महिला परिषद की अध्यक्ष पूनम रुहेला ने कहा कि यह व्रत अपनी संतान की शुभ कामना एवं चिरायु के लिए किया जाता है जिसमें माता लक्ष्मी को अहोई माता के रूप में पूजा जाता है इस वृत का यही संदेश है कि बेटे और बेटी को सामना मानकर अपनी संतान की खुशहाली के लिए वृत करें और जीवो पर दया करें और सेवा करें यही हमारी सनातन संस्कृति है इस अवसर पर मोहिनी वर्मा ने दीप प्रज्वलित के श्री गणेश लक्ष्मी जी का तिलक किया कार्यक्रम का संचालन स्वाति चौधरी ने किया अवसर पर सुषमा देवी, उर्मिला रुहेला, रिंकू सिंह, पारुल वर्मा, चेतना शर्मा, गीता उपाध्याय आदि उपस्थित रही
