कृष्णा ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस, मेरठ के प्रबंधन विभाग के निदेशक डॉ मनोज कुमार सैनी का शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित :

कृष्णा ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस, मेरठ के प्रबंधन विभाग के निदेशक डॉ मनोज कुमार सैनी का शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित :

अमित कम्बोज संवाददाता मवाना*शिक्षा जगत में मेरठ का नाम रोशन करते हुए कृष्णा ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस, मेरठ के प्रबंधन विभाग के निदेशक प्रो. डॉ. मनोज कुमार सैनी का शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त तुर्की यूनिवर्सिटी के जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस शोधपत्र का शीर्षक रिव्यु ऑफ़ ब्रांडिंग स्ट्रैटेजिस इन एजुकेशन सेक्टर है। यह शोध उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ब्रांडिंग रणनीतियों की आवश्यकता और उनकी प्रभावशीलता पर केंद्रित है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में शैक्षणिक संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अपने ब्रांड निर्माण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। ब्रांडिंग के माध्यम से संस्थान न केवल अपनी पहचान सुदृढ़ कर सकते हैं, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और समाज में भरोसे का वातावरण भी स्थापित कर सकते हैं।डॉ. सैनी ने अपने शोधपत्र में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केस स्टडीज़ का विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया है कि किस प्रकार सही ब्रांडिंग रणनीतियाँ अपनाकर शैक्षणिक संस्थान वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सकते हैं। साथ ही, शोध में यह भी सुझाव दिए गए हैं कि भविष्य में भारत के शैक्षणिक संस्थान किस प्रकार अपनी ब्रांड वैल्यू को और मजबूत बना सकते हैं।इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर संस्थान के चेयरमैन विजय राज काकरान ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मनोज कुमार सैनी का यह योगदान न केवल संस्थान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी सिद्ध होगी तथा शिक्षा क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्टता को बढ़ावा देगी।इस अवसर पर प्रो. मनोज कुमार सैनी ने कहा कि मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मेरा शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहा है। मेरा मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संस्था की पहचान और विश्वसनीयता से भी जुड़ी होती है। ब्रांडिंग की प्रभावी रणनीतियाँ संस्थानों को न केवल अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होंगी, बल्कि उन्हें वैश्विक परिदृश्य में भी स्थापित करेंगी। मुझे आशा है कि मेरा यह कार्य शोधकर्ताओं, शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

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