मेरठ, विशेष संवाददाता
मेडिकल थाना क्षेत्र में चल रहे अवैध स्पा सेंटरों को लेकर एक बार फिर से क्षेत्रीय पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। जस्ट डायल और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय यह स्पा सेंटर सिर्फ नाम के लिए ही स्पा हैं, असल में ये सेंटर देह व्यापार के अड्डे बन चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी जानकारी क्षेत्रीय पुलिस को भी है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
ऑनलाइन सिस्टम से होता है ग्राहक और युवतियों का जुड़ाव
जानकारी के अनुसार, इन स्पा सेंटरों पर आने वाले ग्राहकों को पहले व्हाट्सएप पर युवतियों की तस्वीरें भेजी जाती हैं। ग्राहक अपनी पसंद की लड़की चुनकर एडवांस में ऑनलाइन भुगतान कर देते हैं। यह पूरा नेटवर्क तकनीकी रूप से काफी संगठित है, जो पुलिस की आंखों के सामने खुलेआम चल रहा है।
‘द सीजर स्पा’ पर हुई थी कार्रवाई, फिर भी बाकी बचे स्पा सेंटर बेधड़क संचालित
कुछ दिनों पूर्व एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मेडिकल क्षेत्र में संचालित ‘द सीजर स्पा’ पर छापा मार कर उसे बंद करवाया गया था। उस समय लगा था कि शायद अन्य अवैध स्पा सेंटरों पर भी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब भी रेड रोज स्पा (कुटी चौराहा), कॉजी स्पा (मिमेंस हॉस्पिटल के पास), सिल्क सैलून, द क्वीन शेफाली (चौकी इंचार्ज हरेंद्र का कथित सहयोग), रोज वाटर और द एवन स्टूडियो (मंगल पांडे नगर, संचालक अमन) जैसे कई स्पा सेंटर खुलेआम चल रहे हैं।
पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही?
इन अवैध गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम न उठाया जाना यह संदेह पैदा करता है कि या तो पुलिस की मिलीभगत है या फिर भारी लापरवाही। जब भी किसी स्पा सेंटर पर शिकायत मिलती है, पुलिस उसका फायदा संचालकों को पहुंचाते हुए आस-पास के किसी सैलून पर औपचारिकता पूरी कर चली जाती है।
टच स्पा सेंटर की घटना ने खोली पोल
शुक्रवार की शाम ‘टच स्पा सेंटर’ को लेकर जब पुलिस को जानकारी दी गई, तो अपेक्षित कार्रवाई करने के बजाय वह पास के एक अन्य सैलून पर जाकर खानापूर्ति करती रही। इस दौरान टच स्पा सेंटर के संचालक और युवतियाँ समय रहते शटर बंद कर भाग निकले। यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि किस तरह से स्पा सेंटरों को पहले से ही सूचना मिल जाती है।
अब सबकी नजरें वरिष्ठ अधिकारियों पर
मेडिकल थाना क्षेत्र में इस तरह से खुलेआम चल रहे देह व्यापार और पुलिस की निष्क्रियता ने पूरे महकमे की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच कर कार्यवाही करेंगे या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
