काशी में 40 दिनों का रंगोत्सव, पहली बार नागा खेलेंगे मसाने की होली; 11 मार्च को मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली :

काशी में 40 दिनों का रंगोत्सव, पहली बार नागा खेलेंगे मसाने की होली; 11 मार्च को मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली :

काशी में 40 दिनों का रंगोत्सव, पहली बार नागा खेलेंगे मसाने की होली; 11 मार्च को मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली

वाराणसी : काशी में रंगभरी एकादशी और मसाने की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। रंगोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। इस बार नागा साधु भी मसाने की होली में हिस्सा लेंगे।वसंतोत्सव का उल्लास छाने लगा है और इसके साथ काशी में 40 दिनों की होली की शुरुआत हो गई है। 24 फरवरी को पूर्व महंत के आवास से पारंपरिक लोक उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। 10 मार्च को रंगभरी एकादशी होगी। वहीं 11 मार्च को मसाने की होली। इस बार नागा साधु भी मसाने की होली में शामिल होंगे।काशी में होली का बड़ा उत्सव रंगभरी एकादशी और मसाने की होली है। इसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी पर 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उत्सव के साथ होलियाना रंग चटख होने लगेगा। काशी में मसाने की होली भी खास होती है। आयोजन समिति के गुलशन कपूर ने बताया कि 11 मार्च को मसाने की होली मणिकर्णिका घाट पर होगी। भक्त चिता की भस्म से होली खेलेंगे। रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन यह होली होती है।

भगवान शिव ने भूत प्रेतों के साथ खेली थी होली

काशी में मसान की होली, भगवान शिव और पार्वती के विवाह के बाद खेली गई होली की याद में मनाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव ने माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाया था. इस मौके पर उन्होंने अपने गणों के साथ होली खेली थी. हालांकि, वे श्मशान में रहने वाले भूत-प्रेतों के साथ होली नहीं खेल पाए थे. इसलिए, अगले दिन उन्होंने मसान घाट पर भूत-प्रेतों के साथ होली खेली थी.

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