रिपोर्ट लोकेश कुमार।
विगत कुछ सप्ताहों से मेरठ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध निर्माण कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर आवास विकास परिषद की कॉलोनियों में, जहाँ नियमानुसार किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण या बिना स्वीकृति निर्माण की अनुमति नहीं है, वहाँ खुलेआम दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निर्माण जारी है। हैरानी की बात यह है कि इन सबके बावजूद संबंधित अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता चिंता का विषय बनती जा रही है।
कई जगह बन रही हैं अवैध दुकानें
शहर के शास्त्रीनगर, जागृति विहार, गोविंदपुरी, और सरस्वती लोक जैसे इलाकों में आवास विकास की संपत्तियों पर लोग नियमों को ताक पर रखकर दुकानें बना रहे हैं। यह निर्माण रात के समय या सप्ताहांत पर तेजी से किया जा रहा है ताकि अधिकारियों की नज़र से बचा जा सके। इन निर्माणों में न तो कोई नक्शा पास कराया गया है और न ही कोई सरकारी अनुमति ली गई है।
स्थानीय लोग कर रहे विरोध
स्थानीय निवासी इस अवैध निर्माण से परेशान हैं। उनका कहना है कि व्यावसायिक गतिविधियाँ रिहायशी क्षेत्र की शांति को भंग कर रही हैं। कई बार आवाजाही की समस्या भी उत्पन्न होती है। इसके बावजूद जब शिकायत की जाती है तो आवास विकास परिषद के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठाते। कई बार तो शिकायत के बाद अधिकारी निरीक्षण तक नहीं करते।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आवास विकास विभाग के अधिकारी इस तरह की गतिविधियों पर चुप क्यों हैं? क्या उन्हें इन अवैध निर्माणों की जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? लोगों का कहना है कि कहीं न कहीं इसमें विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत भी हो सकती है।
नगर निगम और जिला प्रशासन की भूमिका
हालांकि नगर निगम का दावा है कि वह नियमित निरीक्षण कर रहा है और जहां भी अवैध निर्माण पाया जाता है, वहाँ कार्रवाई की जाती है। लेकिन आवास विकास की भूमि और कॉलोनियों में हो रहे निर्माण सीधे परिषद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जहाँ से किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई अब तक नहीं दिखाई दी है।
अवैध निर्माणों से न केवल शहर की सुंदरता और योजनाबद्ध विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि इससे नियमों की अवहेलना को भी बढ़ावा मिल रहा है। अगर समय रहते इन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में ये समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या आवास विकास परिषद के अधिकारी अपनी चुप्पी तोड़ेंगे और कानून का पालन सुनिश्चित करेंगे?
