भाजपा नेता के होटल में हाई-फाई कैसिनो का भंडाफोड़: 31 जुआरी गिरफ्तार, 17 लाख कैश और लग्जरी गाड़ियां बरामद :

भाजपा नेता के होटल में हाई-फाई कैसिनो का भंडाफोड़: 31 जुआरी गिरफ्तार, 17 लाख कैश और लग्जरी गाड़ियां बरामद :

भाजपा नेता के होटल में हाई-फाई कैसिनो का भंडाफोड़: 31 जुआरी गिरफ्तार, 17 लाख कैश और लग्जरी गाड़ियां बरामद: मेरठ। शहर में जुए के अड्डों पर लगाम लगाने के नाम पर पुलिस की कार्रवाई फिर सवालों के घेरे में है। एक बार फिर मेरठ के दौराला क्षेत्र के दादरी गांव स्थित भाजपा नेता के होटल में हाई-फाई कैसिनो का भंडाफोड़ हुआ है। एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 31 जुआरियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 17 लाख रुपये नकद, 19 लग्जरी गाड़ियां और 40 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, होटल में कई दिनों से जुए की बड़ी महफिलें चल रही थीं, जिसकी गुप्त सूचना मिलने पर पुलिस ने देर रात छापा मारा। जैसे ही पुलिस पहुंची, मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अंकित समेत कई जुआरी मौके से फरार हो गए। ( पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज) इस मामले में पुलिस की मिलीभगत की आशंका के चलते एसएसपी ने दौराला इंस्पेक्टर उत्तम सिंह राठौर, दादरी चौकी इंचार्ज समेत पांच सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। यह कार्रवाई सवाल खड़े करती है कि जब जुए का इतना बड़ा अड्डा एक नेता के होटल में चल रहा था, तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?नौचंदी थाना क्षेत्र में कार्रवाई में भेदभाव?मेरठ में इससे पहले गढ़ रोड स्थित होटल हारमनी इन में भी इसी तरह का हाई-फाई जुआ पकड़ा गया था, जिसमें होटल मालिक नवीन अरोड़ा और उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उस मामले में नौचंदी थाना प्रभारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि उसी तर्ज पर पकड़े गए एक अन्य मामले में राजरानी होटल से जुआ पकड़ने पर संबंधित इंस्पेक्टर को तुरंत लाइन हाजिर कर दिया गया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस महकमा किस आधार पर कार्रवाई कर रहा है? क्या कुछ थानों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यप्रणालीमेरठ में एक के बाद एक होटल में हाई-फाई जुए के अड्डों का भंडाफोड़ यह दिखा रहा है कि यह धंधा केवल अपराधियों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूखदारों और पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है।जहां कुछ मामलों में पुलिस तुरंत कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित या लाइन हाजिर कर रही है, वहीं कुछ मामलों में चुप्पी साध लेना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।जनता और प्रशासन की निगाहेंअब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। वहीं, जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ कर बड़ी मछलियों को छोड़ दिया जाएगा, या इस बार असली जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होगी।

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