“सनातन धर्म की रक्षा को कौन आगे आएगा?” – अतुल शर्मा
मेरठ में खुलेआम फैल रही अनैतिकता की दुकानें, राह भटक रही हैं छात्राएं और युवा
मेरठ, विशेष रिपोर्ट:
शहर की सड़कों, नहरों के किनारे, हाईवे पर बसे गांवों के पास – हर ओर तेजी से उभरते ऐसे होटल और गेस्ट हाउस दिख रहे हैं जिनकी न कोई पहचान है, न कोई पंजीकरण, न सुरक्षा के इंतज़ाम और न ही नैतिकता की कोई सीमा। ये ठिकाने आज के युवाओं को “कुछ देर की मस्ती” का आसान साधन उपलब्ध करा रहे हैं – बिना किसी डर, बिना किसी निगरानी के।
राह भटक रहे युवा – चिंतित हैं समाजसेवी
समाजसेवी अतुल शर्मा ने इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आज का युवा स्कूल, कॉलेज या बाजार का बहाना बनाकर पिता की गाढ़ी कमाई को ऐसे स्थानों पर उड़ा रहा है, जहां उन्हें घंटों के हिसाब से जगह दी जाती है। इन होटलों की कोई वैधानिक निगरानी नहीं होती, और यहां जो कुछ होता है – उसका समाज पर गहरा असर पड़ रहा है।”
OYO के नाम से चल रही बेपरवाह व्यवस्था
कुछ जगहों पर ‘OYO’ नाम से बोर्ड लगे हुए हैं, लेकिन ये नाम महज़ एक दिखावा लगता है। असली स्थिति ये है कि अधिकांश जगहों पर न तो कोई पंजीकरण होता है, न सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और न ही कोई प्रशिक्षित स्टाफ होता है। कोई पूछने वाला नहीं, कोई डर नहीं – एक खुली छूट जैसी स्थिति है।
नहरों और हाइवे के किनारे बना ‘गोपनीयता’ का जाल
मेरठ शहर के बाहरी हिस्सों, नहरों के किनारे और गांवों के पास ऐसे अनगिनत होटल और गेस्ट हाउस खड़े हैं। खेतों के बीच मौजूद ये ढांचे ‘गोपनीयता’ के नाम पर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, और संस्कारों की नींव को खोखला कर रहे हैं।
कहाँ है प्रशासन?
यह सवाल उठना लाजमी है कि जब शहर में यह सब खुलेआम हो रहा है, तो प्रशासन क्या कर रहा है? न पुलिस की रेड, न नगर निगम की जांच, न स्वास्थ्य विभाग की निगरानी। ऐसा लगता है कि या तो सभी आंखें मूंदे बैठे हैं या सब कुछ जानते हुए भी चुप हैं।
संस्कारों की हो रही अवहेलना
घर से निकलते युवा जब बिना किसी संदेह के घंटों गायब रहते हैं, और फिर समय से लौट आते हैं – तो किसी को शक नहीं होता। यह ‘छुपी हुई गिरावट’ समाज के भीतर एक सड़ी हुई जड़ की तरह बढ़ रही है। यह केवल युवाओं की दिशा नहीं बदल रही, बल्कि समाज के भविष्य को भी खतरे में डाल रही है।
अंत में सवाल उठता है – कब तक चुप रहेगा समाज?
अतुल शर्मा का सीधा सवाल है – “क्या अब भी लोग सिर्फ बातें करेंगे, या कोई आगे आकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा? क्या सरकार और प्रशासन की नींद तब खुलेगी जब हालात हाथ से निकल जाएंगे?”
सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादा की रक्षा की बात करने वाले अब कहाँ हैं?
मेरठ शहर की तस्वीर धीरे-धीरे भयावह होती जा रही है। यह केवल अनैतिकता या होटल की बात नहीं है – यह समाज के उस ताने-बाने की बात है, जो वर्षों से हमारी संस्कृति की रीढ़ रहा है। अब समय आ गया है कि लोग बोलें, उठें और एकजुट होकर इस गिरते सामाजिक ढांचे को संभालें। वरना आने वाली पीढ़ियाँ केवल पछतावे की कहानियाँ ही पढ़ेंगी।
