अमित कम्बोज संवाददाता मवाना
मवाना क्षेत्र के भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने सोमवार को क्षेत्र के गांव गणेशपुर में एक जनसभा को संबोधित किया इससे पूर्व कार्यक्रम आयोजक पश्चिमी उत्तरप्रदेश अध्यक्ष अमित त्यागी ने उन्हें काफिले के साथ गांव में भ्रमण कराया। इसके बाद गांव में ही ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने एक जनसभा को संबोधित किया उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का 60% हिस्सा कृषि पर निर्भर है उत्तर प्रदेश भारतवर्ष में गन्ना उत्पादन में सबसे अग्रिम होने के बावजूद भी गन्ना मूल्य में पिछड़ा हुआ है। जिसकी वजह से बढ़ती हुई महंगाई दर व गन्ना किसानो को गन्ने का उचित मूल्य न मिलना व प्रदेश की विभिन्न गन्ना फैक्ट्री द्वारा समय पर भुगतान न करना भी किसान को आर्थिक रूप से व मानसिक रूप से कुठाराघात पहुंचा रहा है। इसके संबंध में मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश से अनुरोध है कि गन्ना किसानों की मनोदशा को देखते हुए गन्ना मूल्य वृद्धि कर 450 रुपए प्रति कुंतल किया जाए तथा जिन गन्ना फैक्ट्री द्वारा समय पर किसानों का भुगतान नहीं किया जाता है। उनके गन्ना क्रय केंद्र में कटौती कर दूसरी गन्ना फैक्ट्री को दिया जाए, जिससे गन्ना किसान अपने परिवार का भरण पोषण कर सके तथा फैक्ट्री द्वारा भुगतान मे विलम्ब करने पर ब्याज सहित भुगतान के लिये ठोस कानून बनाया जाये। उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था निजी हाथी में देने का फैसला निंदनीय कदम है भारतीय किसान यूनियन भानू इसका पुरजोर विरोध करती है समाचार पत्रों व सोशल मीडिया के माध्यम से ज्ञात हुआ कि उत्तर प्रदेश की सरकार बिजली कम्पनियों को सहभागिता के आधार पर निजी क्षेत्र को दिए जाने के लिए कार्य योजना बना रही है। संगठन लगातार बिजली के मुद्दों पर समय-समय पर आन्दोलनरत रहा है। 2001 में कानपुर में बिजली के निजीकरण की पहली कोशिश की गयी, जो कि नाकाम रही। 2009 में कानपुर और आगरा की बिजली व्यवस्था टोरंट पॉवर को देने का एग्रीमेंट उस समय के तत्कालीन सरकार ने कर लिया था,लेकिन विरोध प्रदर्शन के चलते 2013 में राज्य सरकार को यह एग्रीमेंट रद्द करना पड़ा। इन सबके बीच 2010 में आगरा की बिजली टोरंट पॉवर कम्पनी को दे दी गयी जिसका दंश आज भी वहां का आम नागरिक व किसान झेल रहा है। आय के साधन सीमित है। किसान बिल भी जमा नहीं कर पा रहा है। लाखौ रूपये निजी नलकूपों के किसानों पर बकाया चल रहे है। 2018 में सर्वसम्मति से कैबिनेट में दो फैसले लिए जिसमें 6 जिलो को निजीकरण के क्षेत्र में शामिल किया गया। साथ ही लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मुरादाबाद और मेरठ शहर की बिजली व्यवस्था निजी हाथी में दिए जाने का निर्णय लिया। विरोध के चलते इसे वापिस लिया गया। अप्रैल 2018 में ऊर्जामंत्री रहे श्रीकान्त शमी से वार्ता व लिखित समझौते व 2020 में वित्त मंत्री की सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में उस समय समिति के साथ हुए लिखित समझौते में स्पष्टतापूर्वक कहा गया है कि ऊर्जा क्षेत्र में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। उस समय सरकार के द्वारा किया गया समझौता और इस प्रकार से निजी हाथों में बिजली देने का फैसला अपनी बात का उल्लंघन करना है। जिस ओडिशा मॉडल को सरकार व बिजली कम्पनियाँ अपनाना चाह रही है वह पूर्ण तरीके से फेल साबित है। उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के द्वारा बिजली कम्पनियों को घाटे में दिखाकर निजी हाथों में देने का फैसला एक निंदनीय कदम है जिसका भारतीय किसान यूनियन मान् पुरजोर विरोध करती है। इस फैसले से आम जनजीवन व कर्मचारी वर्ग पर भी भारी प्रभाव पड़ेगा। हम सब इस लड़ाई में एकसाथ है और इसे कन्धे से कन्धा मिलाकर लड़ेंगे। इसके अलावा किसानों की करीब बीस समस्याओं के बारे में भी भानु प्रताप सिंह ने अपना वक्तव्य रखा। इस दौरान पश्चिमी उत्तरप्रदेश अध्यक्ष अमित त्यागी,जिलाध्यक्ष पुनीत त्यागी,राजेंद्र कुमार सिंह,अजीत कुमार,सतपाल त्यागी,ज्ञानेश्वर त्यागी आदि मौजूद रहे।
