नवजात बेटी का शव कूड़े के ढेर में मिला; भीषण पीड़ा और सवाल :

नवजात बेटी का शव कूड़े के ढेर में मिला; भीषण पीड़ा और सवाल :

मेरठ! नवरात्र के पहले दिन मेघदूत के पास खड़े कूड़े के ढेर में एक नवजात बच्ची का शव मिलने से इलाके में सदमा फैल गया। राहगीरों और आसपास से गुजर रहे लोगों ने कूड़े के ढेर पर पड़ी बच्ची की लाश देखी और तुरंत यातायात पुलिस को सूचना दी। मौके पर तैनात यातायात पुलिस व स्थानीय थाने की टीम तुरंत पहुंची और कूड़े के ढेर में पड़े नवजात के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।घटना देख रहे लोगों ने बताया कि देखकर ऐसा लग रहा था कि बच्चे को वहीं रात के समय ही किसी ने फेंक दिया होगा। कई लोगों ने दुख जताते हुए कहा — *“आज तो बेटियों का दिन है, देवी पूजा का दिन है और किसी ने यही कर दिया।”* इस तरह का दर्दनाक नज़ारा देख आसपास के लोग स्तब्ध रहे। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस को बताया कि पास के सीसीटीवी फुटेज व अन्य रास्तों की निगरानी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची को किसने और कब छोड़ा। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई व पहचान हेतु आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआती जाँच के बारे में कहा कि मौके का पंचनामा किया जा रहा है तथा आसपास के CCTV, मोबाइल लोकेशन और आसपास के लोगों से पूछताछ कर सीधे सुराग तलाशे जा रहे हैं। मेडिकल टीम को सूचित कर शव का पोस्टमॉर्टेम कराया जाएगा ताकि मौत का कारण व बच्चे की उम्र सटीक तौर पर पता चल सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी सूचित किया गया है। ऐसे दुखद मामलों की भारत में और उत्तर प्रदेश के आस-पास की जिलों में समय समय पर रिपोर्टें सामने आती रही हैं, जहाँ नवजातों को कचरे में या सड़कों पर छोड़ दिया जाता है — कभी-कभी आस-पास के आवारा कुत्तों या चूहों द्वारा क्षति भी हुई पायी गई है। इन घटनाओं पर स्थानीय पुलिस व प्रशासन अक्सर सीसीटीवी व संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई करते हैं। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि नवजातों को छोड़ देने के पीछे कई कारण हो सकते हैं — आर्थिक अभाव, सामाजिक कलंक/लज्जा, अनचाही गर्भावस्था, मानसिक स्वास्थ्य की समस्या, या घरेलू हिंसा/परिवारिक दबाव। ऐसे में केवल दंडात्मक कार्रवाई ही समाधान नहीं है; महिलाओं व गर्भवती युवतियों को सुरक्षा, काउंसलिंग और आर्थिक-सामाजिक समर्थन उपलब्ध कराना उतना ही जरूरी है। स्थानीय महिला संरक्षण इकाइयों, स्वास्थ्य केंद्रों और सामाजिक संगठनों को इस तरह के मामलों की रोकथाम और संवेदनशीलता के साथ निपटने की आवश्यकता है। हम आपसे अपील करते हैं — यदि किसी को घटना के समय या उसके पहले-पछाड़ कोई संदिग्ध गतिविधि दिखी हो, किसी महिला/युवती को अचानक किसी मदद की जरूरत में देखा गया हो, या पास के किसी कैमरे का फुटेज उपलब्ध हो, तो कृपया तुरंत नजदीकी थाने या कंट्रोल रूम को जानकारी दें। स्थानीय प्रशासन को भी चाहिए कि वे महिला सहायता और प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क मजबूत करें ताकि ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं यह समाज की कमजोरियों और उन महिलाओं के लिए कमियों की गवाही है जिन्हें समय पर सहारा नहीं मिला। उम्मीद है कि पुलिस त्वरित, संजीदा और पारदर्शी जांच कर दोषी का पता लगा कर कानून के हिसाब से कार्रवाई करेंगे और साथ ही प्रशासन व सिविल सोसाइटी मिलकर ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के ठोस कदम उठाएंगे।

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