रिपोर्ट लोकेश कुमार।
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास परिषद ने शास्त्री नगर स्थित सेन्ट्रल मार्किट के व्यापारियों को 15 दिन में कॉम्पलेक्स खाली करने का अंतिम नोटिस थमा दिया था साथ ही। यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर परिसर खाली नहीं किया गया तो ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी, और उसका खर्च भी व्यापारियों को देना होगा। जिसकी समय अवधि 30 मई को खत्म हो चुकी है! जहां एक ओर पुराने सेन्ट्रल मार्किट को प्रशासनिक दबाव में लाया जा रहा है, वहीं शास्त्री नगर में कई ऐसे निर्माण स्थल हैं, जहां खुलेआम अवैध निर्माण कार्य जारी है। इन स्थानों पर आवास विकास अधिकारी सिर्फ ‘नोटिस चस्पा’ कर अपनी जिम्मेदारी निभा देने का दावा कर रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे उलट है।
1. शास्त्री नगर में 2/1 पर दिखावे की सील बाकियो पर अभी ढील:पुलिस चौकी के पास स्थित इस स्थल पर दिखावटी सील लगा दी गई ।
जबकि कुछ दुरी पर 762/2 दो मंजिला की जगह चार मंजिला बन गया लेकिन कोई नोटिस तक चस्पा नहीं किया गया!
जब इस बारे में अधिकारियों से पूछा गया तो उनका जवाब था – “इसकी कंपाउंडिंग होगी”, लेकिन यह प्रक्रिया कब और कैसे होगी, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।2. 533 /6 –और 511/6 प्रशासन की अनदेखी या मिलीभगत?
इस पते पर जारी निर्माण कार्य को लेकर नोटिस चस्पा किया गया, जिसे निर्माणकर्ता ने फाड़ दिया। इसके बाद भी निर्माण कार्य जारी है। जब आवास विकास के सहायक अभियंता अजब सिंह से बात की गई तो उनका जवाब था – “काम रुकवा दिया गया है।” लेकिन स्थानीय स्तर पर देखा गया कि निर्माण कार्य पूरे जोरों से जारी है। अधिकारी के बयान और ज़मीनी स्थिति में स्पष्ट विरोधाभास नज़र आ रहा है।
3. 762/2, PNB बैंक के निकट – चार मंज़िला निर्माण के बाद भी चुप्पी:यह निर्माण चार मंज़िल तक पूरा हो चुका है। बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल ये उठता है कि अगर कल को कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?सेन्ट्रल मार्किट व्यापारी सवाल उठा रहे हैं:व्यापारियों का कहना है कि 30 साल पहले बना सेन्ट्रल मार्किट, जिसे तत्कालीन आवास विकास अधिकारियों की अनुमति से विकसित किया गया था, आज अचानक निशाने पर क्यों है? जबकि आसपास हो रहे ताज़ा निर्माण, जिनमें कई ने अभी बेसमेंट या ढांचा बनाना शुरू ही किया है, उन्हें सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया जा रहा है।अंत में सवाल यही है:क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल सेन्ट्रल मार्किट के लिए है?क्या आवास विकास विभाग की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है?क्या अधिकारी मनमाने ढंग से पुराने निर्माण को निशाना बना रहे हैं और नए निर्माणों को मौन सहमति मिल रही है?
