क्रांति की धरती मेरठ फिर से करेगी आज़ादी के दीप जलाने की याद ताज़ा — 10 मई को (कल) मनेगा क्रांति दिवस :

क्रांति की धरती मेरठ फिर से करेगी आज़ादी के दीप जलाने की याद ताज़ा — 10 मई को (कल) मनेगा क्रांति दिवस :

मेरठ! 1857 की 10 मई को जो चिंगारी मेरठ की धरती से उठी थी, उसने पूरे भारत में आज़ादी की ज्वाला भड़का दी थी। आज उसी गौरवशाली घटना को 163 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 मई (शनिवार) को क्रांति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत मेरठ से ही हुई थी, जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सिपाहियों ने बगावत का बिगुल फूंका। यह केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि आज़ादी की पहली संगठित आवाज़ थी, जिसमें आम जन और सैनिक एकजुट होकर विदेशी सत्ता के विरुद्ध खड़े हुए। मेरठ: क्रांति का उद्गम स्थल मेरठ आज भी उन ऐतिहासिक स्मृतियों को संजोए हुए है। संग्रहालय, शहीद स्मारक, और क्रांति उद्यान जैसे स्थान उस इतिहास के गवाह हैं, जिसने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना फैलाई। आज भी यहां आने वाले लोग उस मिट्टी में उस त्याग और बलिदान की भावना को महसूस करते हैं। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी उस पहली लहर ने बाद में 90 वर्षों तक चलने वाले स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।( शहर में होंगे कई कार्यक्रम) क्रांति दिवस के उपलक्ष्य में मेरठ में विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक एवं देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी, और स्कूली बच्चे गीत, भाषण एवं नाटक के माध्यम से क्रांति की स्मृतियों को पुनर्जीवित करेंगे। इतिहास की पुकार आज भी गूंजती है इतिहासकारों का मानना है कि मेरठ की क्रांति केवल एक सैनिक विद्रोह नहीं थी, बल्कि यह उस समय के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक असंतोष का विस्फोट था। इसका प्रभाव पूरे देश में फैला और जल्द ही दिल्ली, कानपुर, झांसी, लखनऊ जैसे शहरों में भी विद्रोह की लहर दौड़ गई।मेरठवासियों के लिए गर्व का दिनआज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो हमें उन वीर सपूतों का स्मरण करना चाहिए जिन्होंने इस आज़ादी की नींव रखी। मेरठवासियों के लिए यह दिन एक गर्व का दिन है — जब उनकी भूमि से उठी क्रांति ने पूरे देश को आज़ादी का सपना दिखाया।

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