राष्ट्रीय हिन्दू संघर्ष समिति द्वारा बंगाल में हो रही जातिवादी हिंसा के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा :

राष्ट्रीय हिन्दू संघर्ष समिति द्वारा बंगाल में हो रही जातिवादी हिंसा के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा :

अमित कम्बोज

आज बुधवार मवाना नगर के तहसील परिसर में राष्ट्रीय हिन्दू संघर्ष समिति द्वारा बंगाल में हो रही जातिवादी हिंसा के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति के लिए उप जिलाअधिकारी को ज्ञापन सौंपा और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग उठाई।

आज राष्ट्रीय हिन्दू संघर्ष समिति के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल में हिंदू समाज पर हो रहे सुनियोजित अत्याचारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई व अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लागू करने हेतु महामहिम राष्ट्रपति के नाम मवाना उपजिलाधिकारी दीपक माथुर के माध्यम से भेजा गया। जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने एसडीएम को बताया कि पश्चिम बंगाल में हिंदू समाज के विरुद्ध हो रहे सुनियोजित और लगातार बढ़ते हमलों से न केवल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हो रहा है बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। ये घटनाएं न केवल धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को कुचल रही हैं l पश्चिम बंगाल में जो तुष्टीकरण की नीति पर चल रहा है। हाल ही में रामनवमी और हनुमान जयंती के अवसर पर हमले बोलकर हिंदू समाज को टारगेट कर हिंसा की गई मार्च और अप्रैल 2024-25 के दौरान, रामनवमी और हनुमान जयंती पर आयोजित धार्मिक शोभायात्राओं पर बंगाल के हावड़ा, उत्तर 24 परगना, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और अन्य जिलों में हिंसक भीड़ द्वारा सुनियोजित हमला किया गया। तलवार,पैट्रोल बम और पत्थरों से हमले हुए, मंदिरों में तोड़फोड़ हुई और धार्मिक नारों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। 12 अप्रैल 2025 को मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज इलाके में पूजा कर रहे एक हिंदू परिवार पर हमला हुआ। हमलावर घर में घुस आए और तोड़फोड़ की व महिलाओं से अभद्रता करते हुए उन्हें उठा कर ले जाने की कोशिश भी की l और ममता सरकार कार्यवाही करने की जगह लीपा पोती में लगी हुई है l जिससे वहां के शासन प्रशासन पर हिंदुओं का भरोसा उठ चुका है l इसलिए वहां रह रहे हिंदु पलायन को मजबूर हो गए हैं l 12 अप्रैल 2025 को मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज क्षेत्र के जाफराबाद गांव में वक्फ संपत्ति विवाद को लेकर हुई हिंसा में एक उन्मादी भीड़ ने हरगोबिंद दास (72) और उनके पुत्र चंदन दास (40) की निर्मम हत्या कर दी। हमलावरों ने उनके घर में घुसकर उन्हें बाहर खींचा, बेरहमी से पीटा और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी गोली लगने से मृत्यु हुई। मालदा, बसीरहाट और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में कई हिंदू परिवार लगातार पलायन कर रहे हैं। असुरक्षा की भावना के चलते सैकड़ों परिवार अपना घर-बार छोड़ चुके हैं। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव स्पष्ट है। दंगों में पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं होती, और उल्टे हिंदू युवकों को ही गिरफ्तार किया जाता है। हिंसा के पीछे सक्रिय कट्टरपंथी तत्वों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। राज्य सरकार की निष्क्रियता और तुष्टीकरण की नीति ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। हिंदू धार्मिक गतिविधियों पर रोक और असहिष्णु व्यवहार अब आम हो चला है।
संगठन पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति से पश्चिम बंगाल में हुई हिंसक घटनाओं की सीबीआई या न्यायिक आयोग द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाने, हमलों में पीड़ित परिवारों को संरक्षण, पुनर्वास और उचित मुआवजा प्रदान किए जाने, प्रशासनिक निष्क्रियता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई किए जाने, राज्य में अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने, देशभर में धार्मिक अल्पसंख्यकों या बहुसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निगरानी हेतु एक राष्ट्रीय सांप्रदायिकता निगरानी आयोग की स्थापना किए जाने की मांग उठाई। ज्ञापन देने वालों मे राष्ट्रीय हिन्दू संघर्ष समिति के मेरठ जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र अग्रवाल के साथ राजू सैनी, विनय दुबलिश,अनुज रस्तोगी,वेदप्रकाश चौहान, अमर रस्तोगी, राजेश अग्रवाल, नीटूपाल, विनोद गुप्ता, अजय दुबलिश, संदीप रस्तोगी, संजय दुबलिश, राजेश शर्मा, प्रतीक जैन,विकास गोयल, सतीश भारद्वाज,रजनीश रोहल, अमित रस्तोगी, मयंक रस्तोगी,विवेक गुप्ता, आलोक गुप्ता आदि शामिल रहे।

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