मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में आज दिनांक 18 फरवरी, 2026 को ब्राजील के माननीय कृषि मंत्री’लुइज पाऊलो टेक्जीरा फेरीरा’ ने अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ भ्रमण किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ ऐ. के. नायक, सहायक महानिदेशक डॉ ए. वेलमुरूगन एवं कृषि प्रणाली संस्थान के निदेशक डॉ सुनील कुमार ने माननीय मंत्री महोदय एवं प्रतिनिधि मंडल का स्वागत किया एवं प्रतिनिधिमंडल के साथ परिचर्चा में भाग लिया। मंत्री महोदय एवं उनके दल ने पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने हेतु प्रकृति आधारित समाधान एवं प्राकृतिक खेती के ऊपर वैज्ञानिकों के साथ गहन परिचर्चा की। ब्राज़ीली भ्रमण दल ने कृषि प्रणाली संस्थान में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत चल रहे मॉडल प्राकृतिक फॉर्म का भ्रमण भी किया। मिशन के मुख्य वैज्ञानिक डॉ एन. रविशंकर ने ब्राज़ीली प्रतिनिधिमंडल को प्राकृतिक खेती में उपयोग आने वाले विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक आगतों के उत्पादन एवं उनके उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ चंद्रभानु ने प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले आगतों के उत्पादन का प्रदर्शन करके दिखाया और लघु एवं सीमांत किसानों हेतु विकसित किए गए मॉडल नेचुरल फॉर्म को भी दिखाया । माननीय मंत्री महोदय ने क्षेत्र के जाने-माने प्राकृतिक किसानों श्री सुनील कुमार, ग्राम भमौरी, मेरठ एवं श्री विकास बालियान, ग्राम भोरा-खुर्द, मुजफ्फरनगर के साथ प्राकृतिक खेती को लाभकारी बनाने के ऊपर गहन विचार विमर्श किया। उन्होंने किसानों के द्वारा उत्पादित गुण एवं अन्य उत्पादों की विस्तार से जानकारी ली तथा खाकर उनका जाएजा भी लिया। भ्रमण के पश्चात ब्राजील के माननीय कृषि मंत्री ने भारत के वैज्ञानिकों एवं किसानों के साथ मिलकर पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने हेतु, तकनीकी आदान-प्रदान में अपनी रुचि दिखाई। ब्राज़ीली प्रतिनिधिमंडल की ओर से श्री मॉरिसियों पालीडोरो, मिस मिरांडा डी ओलिवेरिया, श्री जोश क्रिस्पिनियानो जूनियर, श्री इडुवार्र्डो ब्रागा एवं एवं पुर्तगाली-हिंदी-अंग्रेजी अनुवादक श्री जसमीत सिंह चावला जी ने भाग लिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से श्रीमती गुलविना बधान ने परिचर्चा में भाग लिया । इस अवसर पर डॉ. आर. पी. मिश्र, डॉ राघवेंद्र सिंह, डॉ टी.पी. स्वर्णम, डॉ पी. सी. जाट, डॉ ए. के. प्रुष्टि, डॉ अमृत लाल मीणा, डॉ रघुवीर सिंह, डॉ कमलेश कुमार, डॉ राघवेंद्र के. जे. सहित सभी वैज्ञानिकों ने परिचर्चा में भाग लिया।
