अमित कम्बोज संवाददाता मवाना।
आज रविवार मवाना क्षेत्र के हस्तिनापुर में महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी को विकसित करने के लिए बड़ा बजट खर्च कर हस्तिनापुर विश्व पटल पर लाना चाह रही है। लेकिन विभागीय अधिकारी की अनदेखी के व मेहरबानी के चलते नगर की ऐतिहासिकता बताने वाले निर्माण कार्यों में निर्माण अधीन कंपनी लगातार घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग कर रही है। जिसमें निर्माण में पीली ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है l उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में पर्यटन विभाग द्वारा पांडवों की नगरी के सौंदर्यीकरण और पौराणिक विरासत से रूबरू कराने के लिए लगभग करीब पंद्रह करोड रुपये की लागत से ऐतिहासिक नगरी को प्राचीन स्वरूप में लौटाने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा लगभग पंद्रह करोड़ रुपये की लागत पांच गेट, स्तंभ, शिलापट व सड़क के निर्माण कार्यों की शुरुआत की लेकिन विभागीय अधिकारियों व निर्माण अधीन कंपनी निर्माण कार्यों में मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग ना कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रही है। लेकिन शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी निर्माण अधिनियम कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। विभागीय अधिकारी निर्माणाधीन कंपनी द्वारा कर्ण घाट के समीप गेट के निर्माण में पिली ईंट व द्रौपदी घाट पर जाने वाली सड़क के निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। कार्य में बढ़ती जा रही इस लाभ प्रवाही पर ऐतिहासिक नगरी के लोग सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। और ना ही उनके कानों पर कोई जू रेग रही है l विभागीय अधिकारी अपनी मनमानी करने पर तुले हुए हैं l और नहीं संबंधित अधिकारियों में इसका कोई भाय है l अभियंता विनय यादव का कहना है की पीली ईटन भूल वंश आ गई हैं l जबकि वास्तविकता यह है कि जबकि निर्माण कार्य में लगातार पीली ईंटों का प्रयोग हो रहा है।
