मेरठ में आवास विकास में फुटपाथ  की सरकारी जमीन पर कब्जे ,आरटीओ रोड पर फुटपाथ की जमीन पर बने अवैध निर्माण कार्रवाई की मांग :

मेरठ में आवास विकास में फुटपाथ की सरकारी जमीन पर कब्जे ,आरटीओ रोड पर फुटपाथ की जमीन पर बने अवैध निर्माण कार्रवाई की मांग :

मकान नंबर 110 सेक्टर-12 का मामला उठा; अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल, जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से कार्रवाई की मांगमेरठ। शहर में आवास विकास परिषद की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माणों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरटीओ रोड स्थित सेक्टर-12 में मकान नंबर 110 के मामले में आवास विकास की भूमि पर कथित कब्जा कर निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई है। शिकायत के आधार पर संबंधित भूमि के स्वामित्व, निर्माण की वैधता और स्वीकृत नक्शे की जांच कराए जाने की मांग की जा रही है।आरोप है कि आरटीओ रोड पर फुटपाथ अथवा सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित भूमि पर करीब एक दर्जन स्थानों पर निर्माण कराए गए हैं। इन निर्माणों के कारण सरकारी भूमि की सुरक्षा और सड़क किनारे पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित भूखंडों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।कार्रवाई कुछ पर, बाकी पर मेहरबानी क्यों?शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि यदि आवास विकास परिषद अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, तो कथित रूप से सरकारी भूमि या फुटपाथ पर बने अन्य निर्माणों की जांच क्यों नहीं कराई जा रही? क्या सभी निर्माणों के पास वैध स्वीकृति है? यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी?मामले में आवास विकास परिषद के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़ सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों की मिलीभगत या किसी को संरक्षण दिए जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।व्यापारियों में कार्रवाई को लेकर नाराजगी की आशंकामेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई और नियमों के समान रूप से पालन को लेकर व्यापारियों तथा स्थानीय लोगों के बीच असंतोष की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। मांग उठ रही है कि किसी भी कार्रवाई में भेदभाव न हो और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक निर्माण की निष्पक्ष जांच की जाए।साथ ही, संबंधित प्रकरण में लागू न्यायालयीन आदेशों और आवास विकास परिषद के नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है। किसी न्यायालय के आदेश का इस विशेष मामले पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह संबंधित आदेश और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है।जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से हस्तक्षेप की मांगमामले को लेकर मेरठ के जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और आवास विकास परिषद के सक्षम अधिकारियों से मांग की जा रही है कि मकान नंबर 110, आरटीओ रोड, सेक्टर-12 सहित सड़क किनारे स्थित संदिग्ध निर्माणों की स्थलीय जांच कराई जाए। राजस्व अभिलेखों, भूमि के स्वामित्व, स्वीकृत नक्शों और निर्माण संबंधी अनुमतियों का मिलान किया जाए।यदि जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या नियमों के विरुद्ध निर्माण की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अतिक्रमण हटाने, ध्वस्तीकरण तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।अब बड़ा सवाल यह है कि आरटीओ रोड पर फुटपाथ और आवास विकास की भूमि से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी? क्या जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा या मामला शिकायतों तक ही सीमित रहेगा? शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती है, तो वे मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष ले जाने का विकल्प अपना सकते हैं।

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