अखिलेश गोयल से जुड़ी बताई जा रही सैकड़ों बीघा जमीन पर कॉलोनी विकसित करने का आरोप, आईजीआरएस निस्तारण की भी जांच की मांगमेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के जोन-B4 क्षेत्र में रोहटा रोड पर कृष्ण वर्ल्ड अप्रूव्ड कॉलोनी से करीब 150 मीटर आगे कथित रूप से अवैध कच्ची कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही है, वह अखिलेश गोयल से संबंधित बताई जा रही है और यहां लंबे समय से सड़क निर्माण, प्लॉटिंग तथा बिक्री का काम चल रहा है।शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस मामले को लेकर करीब एक वर्ष से विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की जा रही हैं। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर भी शिकायत दर्ज कराए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि पोर्टल पर प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई और ध्वस्तीकरण का निस्तारण दर्शाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता को कार्रवाई के समर्थन में अपेक्षित फोटो अथवा मौके की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में दोबारा शिकायत किए जाने पर कॉलोनी की सड़क के करीब 200 गज हिस्से में गड्ढा कर उसे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के रूप में दर्शाया गया। आरोप है कि कुछ समय बाद सड़क को फिर दुरुस्त कर दिया गया और प्लॉटों की बिक्री दोबारा शुरू हो गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।मामले में एमडीए के क्षेत्रीय अभियंता जितेंद्र कुमार की भूमिका पर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, किसी अधिकारी की मिलीभगत या भ्रष्टाचार की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और एमडीए उपाध्यक्ष को भी लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन उसके बावजूद कथित कॉलोनी के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब शिकायतकर्ता ने शासन स्तर से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई है।भोला झाल रोड पर भी नई कॉलोनियों का आरोपशिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भोला झाल रोड क्षेत्र में भी कृषि भूमि पर नई कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं और जमीन को ऊंचे दामों पर प्लॉट के रूप में बेचे जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने इन स्थानों की भी राजस्व अभिलेखों, भूमि उपयोग, लेआउट स्वीकृति और मौके की स्थिति से जांच कराने की मांग की है।सुप्रीम कोर्ट के रुख के बीच उठे सवालमेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख हाल में सख्त रहा है। 21 सितंबर 2026 की सुनवाई से जुड़े आदेशों के बाद मेरठ की अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित किए जाने और उल्देपुर क्षेत्र में अवैध निर्माण व कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देशों की रिपोर्ट सामने आई है।ऐसे में रोहटा रोड पर शिकायत में बताए गए स्थल पर वास्तव में कॉलोनी स्वीकृत है या नहीं, भूमि का उपयोग क्या है और पूर्व में आईजीआरएस पर की गई कार्रवाई वास्तविक रूप से मौके पर हुई थी या नहीं—इन सवालों की जांच जरूरी बताई जा रही है।अब देखना यह है कि शासन और एमडीए इस मामले में मौके का स्थलीय निरीक्षण, राजस्व अभिलेखों की जांच और पूर्व शिकायतों में दर्शाई गई कार्रवाई का सत्यापन कराकर जिम्मेदारी तय करते हैं या नहीं।
