गढ़ में राशन माफिया भूषण कर रहे राशन की कालाबाजारी हापुड़ डीएम और जिला पूर्ति अधिकारी की निगरानी पर सवाल :

गढ़ में राशन माफिया भूषण कर रहे राशन की कालाबाजारी हापुड़ डीएम और जिला पूर्ति अधिकारी की निगरानी पर सवाल :

गढ़मुक्तेश्वर में राशन की कथित कालाबाजारी से मचा हड़कंप, जिम्मेदार विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
मेरठ रोड पर गोदाम के बाहर खड़े कई वाहनों का वीडियो वायरल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने के आरोप
गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़।


गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले राशन की कथित कालाबाजारी का मामला गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मेरठ रोड स्थित एक गोदाम के बाहर राशन से लदे कई वाहनों के खड़े होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बड़ी संख्या में वाहन राशन से लदे नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन वाहनों के माध्यम से राशन को दूसरे जिलों में भेजकर कथित रूप से अवैध बिक्री की जा रही है।
मामले में भूषण नाम के व्यक्तियों से जुड़े गोदामों पर राशन की कथित कालाबाजारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पुलिस और पूर्ति विभाग की टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच किए जाने के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ पाया और कथित गतिविधियां जारी हैं।
सबसे बड़ा सवाल खाद्य एवं रसद विभाग की निगरानी व्यवस्था और स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। यदि सरकारी राशन वास्तव में निर्धारित वितरण व्यवस्था से हटकर दूसरे स्थानों पर भेजा जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ संबंधित गोदामों, वाहनों, स्टॉक रजिस्टर, राशन के स्रोत और परिवहन दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
सरकार गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन पहुंचा रही है। ऐसे में यदि सरकारी अथवा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े राशन की अवैध बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।
डीएम और जिला पूर्ति अधिकारी की निगरानी पर सवाल
मामले को लेकर हापुड़ जिलाधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतों और वायरल वीडियो के बावजूद यदि मौके पर मौजूद गतिविधियों की निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो इससे विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मेरठ रोड स्थित संबंधित गोदामों का अचानक निरीक्षण, स्टॉक का भौतिक सत्यापन, सीसीटीवी फुटेज की जांच, राशन की आवक-जावक का मिलान तथा राशन से जुड़े वाहनों के दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कथित रूप से राशन किन जिलों में भेजा जा रहा है और उसके पीछे वास्तविक स्रोत क्या है।
राजधानी तक पहुंचने से पहले हो निष्पक्ष जांच
मामले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो केवल मौके पर जाकर खानापूर्ति करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों और राशन कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वहीं, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह है कि हापुड़ प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग वायरल वीडियो तथा शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कर कथित राशन कालाबाजारी के नेटवर्क का खुलासा करते हुए जिम्मेदारी तय की जाती है।

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