ई-रिक्शा संचालक का तानाशाही रवैया: पुलिस सिपाही से गाली-गलौच और धक्का-मुक्की के बाद माफी पर छूटा :

ई-रिक्शा संचालक का तानाशाही रवैया: पुलिस सिपाही से गाली-गलौच और धक्का-मुक्की के बाद माफी पर छूटा :

रिपोर्ट तरुण आहुजा।

ई-रिक्शा संचालक का तानाशाही रवैया: पुलिस सिपाही से गाली-गलौच और धक्का-मुक्की के बाद माफी पर छूटा

मेरठ। शहर में ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और तानाशाही का एक और मामला सामने आया है। मंगलवार को कुटी चौराहे पर एक ई-रिक्शा चालक ने खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक पुलिस सिपाही के साथ गाली-गलौच और धक्का-मुक्की कर दी। मौके पर भीड़ एकत्र हो गई, जिसके बाद हालात बिगड़ने लगे। हालांकि, बाद में माफी मांगने के बाद ई-रिक्शा चालक को छोड़ दिया गया।क्या है पूरा मामला?मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे कुटी चौराहे पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई थी। इसी दौरान एक पुलिस सिपाही ने एक ई-रिक्शा चालक को गलत दिशा में जाने से रोकने की कोशिश की। सिपाही ने चालक को नियमों का पालन करने की सलाह दी, लेकिन इसके बजाय चालक ने सिपाही के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया।मामला इतना बढ़ गया कि ई-रिक्शा चालक ने गाली-गलौच करते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी। यह घटना होते ही वहां मौजूद स्थानीय लोग और राहगीर इकट्ठा हो गए। भीड़ की मौजूदगी के बीच चालक और अधिक आक्रामक हो गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।माफी के बाद छोड़ा गया चालकस्थिति को बिगड़ता देख मौके पर अन्य पुलिसकर्मी भी पहुंच गए। हालात को संभालने के लिए अधिकारियों ने पहले लोगों को शांत कराया। इसके बाद ई-रिक्शा चालक को हिरासत में लेने की तैयारी की गई, लेकिन चालक ने माफी मांग ली। पुलिसकर्मियों ने मामले को ज्यादा तूल न देते हुए चालक को सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया।ई-रिक्शा चालकों की बढ़ती मनमानीमेरठ में ई-रिक्शा चालकों की मनमानी और नियमों की अवहेलना कोई नई बात नहीं है। शहर में कई इलाकों में ई-रिक्शा चालकों के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। कई बार ये चालक नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाते हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी होती है।राजनीतिक संरक्षण का असरस्थानीय लोगों का कहना है कि कई ई-रिक्शा चालक राजनीतिक संरक्षण के चलते कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हैं। किसी भी प्रकार की कार्रवाई होने पर नेताओं का दबाव पुलिस पर बना दिया जाता है, जिससे पुलिस भी कार्रवाई करने से पीछे हट जाती है।पुलिस की छवि पर सवालइस घटना ने एक बार फिर पुलिस की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सिपाही के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के बावजूद भी कानूनी कार्रवाई न होना, पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़ा करता है। आमजन का भी यही कहना है कि यदि पुलिसकर्मी खुद ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे?प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरतइस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करते हुए ई-रिक्शा चालकों पर नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाए और जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई करे।कुटी चौराहे की यह घटना न केवल पुलिस प्रशासन की लचरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि ई-रिक्शा चालक किस कदर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। पुलिस को अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक स्पष्ट संदेश देना होगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। तभी शहर में कानून व्यवस्था की बहाली संभव हो सकेगी।

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