11 वें आयुर्वेद दिवस पर ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ का दिया संदेश, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को दिनचर्या एवं ऋतुचर्या के प्रति किया जागरूकमथुरा। आयुर्वेद के प्रति आमजन को जागरूक करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, खामिनी की ओर से ग्राम सतोहा में ‘आयुष आपके द्वार’ कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क आउटरीच स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 102 लाभार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें चिकित्सीय परामर्श दिया गया तथा आवश्यकतानुसार औषधियों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और रोगियों को आयुर्वेद के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।यह स्वास्थ्य शिविर माननीय आयुष मंत्री, महानिदेशक एवं निदेशक के दिशा-निर्देशन तथा क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी मथुरा डॉ. डिगम्बर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। शिविर के दौरान चिकित्साधिकारी डॉ. ऋतु सांगवान ने स्वास्थ्य संगोष्ठी के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ थीम पर दिया जोरसंगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. ऋतु सांगवान ने 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ (Ayurveda for a Healthier Tomorrow) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की एक पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का संपूर्ण विज्ञान है। आयुर्वेद हजारों वर्षों से मानव स्वास्थ्य की रक्षा करने और जीवनशैली को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है।उन्होंने बताया कि आयुर्वेद का मूल उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग का निवारण करना है। इसके लिए नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग, पर्याप्त विश्राम और ऋतु के अनुसार जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।असंतुलित जीवनशैली से बढ़ रही बीमारियांडॉ. ऋतु सांगवान ने कहा कि वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खान-पान के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में स्वस्थ और सुखी भविष्य के निर्माण के लिए आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाना जरूरी है।उन्होंने ग्रामीणों को दिनचर्या (दिन में अपनाई जाने वाली स्वास्थ्य संबंधी आदतें) और ऋतुचर्या (मौसम के अनुसार खान-पान एवं जीवनशैली में बदलाव) के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि समय पर सोना-जागना, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना, नियमित योग और व्यायाम करना तथा स्वच्छता का ध्यान रखना बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार के सदस्यों को भी आयुर्वेद के प्रति जागरूक करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बीमारियों से बचाव के लिए प्रयास करें।गांव-गांव तक आयुर्वेद का संदेश पहुंचाने का संकल्पस्वास्थ्य शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। शिविर में लाभार्थियों का नाड़ी परीक्षण कर उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद चिकित्सीय परामर्श दिया गया और आवश्यकतानुसार औषधियों का वितरण किया गया।संगोष्ठी के समापन पर डॉ. ऋतु सांगवान ने सभी से आयुर्वेदिक जीवनशैली की उपयोगी आदतों को अपनाने, पर्यावरण की सुरक्षा करने और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने ‘निरोगी रहें, स्वस्थ रहें’ का संदेश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही बेहतर भविष्य की आधारशिला है।स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे ग्रामवासियों, रोगियों और श्रद्धालुओं ने चिकित्साधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। ग्रामीणों ने इस प्रकार के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों को जनहित में उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।
