होटलों में कैसे हो रही लोगों की मौत लगातार सामने आ रही घटनाओं की जांच की मांगमेरठ। सदर बाजार थाना क्षेत्र के बेगमपुल स्थित लिब्रा होटल के बाथरूम में मंगलवार को एक फौजी का शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान पलविंदर निवासी अंबाला के रूप में बताई गई है। वह रुड़की में तैनात था और पिछले कुछ समय से बीमारी का इलाज करा रहा था। घटना के बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।जानकारी के अनुसार पलविंदर को उसके दो साथी छुट्टी मिलने के बाद होटल लेकर पहुंचे थे। दोनों साथी कुछ समय के लिए होटल से बाहर गए। वापस लौटने पर पलविंदर बाथरूम में मृत अवस्था में मिला। घटना के बाद होटल प्रबंधन और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।लगातार होटल परिसरों में मौत की घटनाओं ने बढ़ाई चिंतालिब्रा होटल में फौजी की मौत की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब मेरठ के एक अन्य होटल में युवक की मौत का मामला भी चर्चा में है। हाल ही में खालसा होटल में शामली निवासी युवक का शव कमरे में मिलने की घटना सामने आई थी। बताया गया कि युवक ने होटल में कई दिनों के लिए कमरा बुक कराया था। इन घटनाओं के बाद सवाल उठ रहा है कि होटल परिसरों में ठहरने वाले लोगों की सुरक्षा और निगरानी के लिए पुलिस तथा होटल प्रबंधन द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं का कितना पालन किया जा रहा है।स्थानीय स्तर पर लिब्रा होटल को लेकर पूर्व में भी आत्महत्या, मारपीट और अन्य घटनाओं की चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इन घटनाओं और वर्तमान मामले के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि पुलिस जांच या पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अभी नहीं हुई है।शराब परोसने के आरोपों की भी जांच की मांगस्थानीय लोगों का आरोप है कि होटल परिसर में शराब परोसे जाने और अन्य गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में आबकारी विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की मांग की जा रही है। सवाल यह है कि यदि होटल में बिना आवश्यक अनुमति या लाइसेंस के शराब परोसे जाने की शिकायतें सामने आई थीं तो संबंधित विभाग ने क्या जांच की और क्या कार्रवाई की?होटल के संबंध में बिजली चोरी समेत पूर्व में उठे विवादों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। इन पुराने मामलों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है।होटल मालिक की पहुंच को लेकर भी उठ रहे सवालजानकारी के अनुसार लिब्रा होटल का संबंध गुरुद्वारा सिंह सभा थापर नगर के प्रधान सरदार रणजीत सिंह से बताया जा रहा है। इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने के कारण होटल के खिलाफ शिकायतों पर विभागों ने कभी गंभीरता से कार्रवाई की या नहीं।हालांकि किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर संरक्षण देने या नियमों के उल्लंघन का आरोप आधिकारिक जांच के बिना साबित नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।अधिकारियों से पांच बड़े सवालहोटल में हुई पिछली मौतों और अन्य घटनाओं की पुलिस जांच का परिणाम क्या रहा?होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई या नहीं?होटल में शराब परोसने के लिए वैध लाइसेंस और निर्धारित अनुमति मौजूद है या नहीं?होटल के सुरक्षा मानकों, गेस्ट रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच कब की गई?यदि होटल के खिलाफ पूर्व में शिकायतें मिली थीं तो पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा सचफौजी की मौत को लेकर फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन लगातार होटल परिसरों से मौत और विवादों की घटनाएं सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है।जरूरत है कि लिब्रा होटल के सीसीटीवी फुटेज, गेस्ट रजिस्टर, होटल कर्मचारियों के बयान, मृतक के साथ आए दोनों साथियों से पूछताछ तथा होटल में शराब परोसने से संबंधित लाइसेंस और दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही पूर्व में सामने आई घटनाओं की भी रिकॉर्ड के आधार पर समीक्षा हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी मामले में लापरवाही तो नहीं हुई।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर होटल में पहले भी गंभीर घटनाएं सामने आती रही हैं तो संबंधित विभागों ने समय रहते सुरक्षा और नियमों की जांच क्यों नहीं की? फौजी की मौत के बाद उठे ये सवाल जांच पूरी होने तक बने रहेंगे।
