रिपोर्ट लोकेश कुमार
बेंको से गायब लेकिन बाजार मे ब्लेक मे बिकते नजर आ रहे दस बीस के नये नोट :
मेरठ फरवरी का महीना और शादी का सीजन लेकिन 10, और 20 रुपये की नई गड्डियां बैंकों से लगभग गायब सी हो गई हैं। शादी विवाह के लिए जरूरमंद लोग करीब 400/- से 600/- रूपये एक्स्ट्रा देकर घंटाघर के नीचे बनी दुकानों और कोटले मे से ले रहे है शादी ब्याह के दौरान अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने परिवार में होने वाली शादी के लिए 10, के नोटों की गड्डियां तलाशते रहते हैं लेकिन यह देखा जा रहा है कि बैंकों में 10, 20 की गड्डियां नदारद ही दिखाई देती है। काफी प्रयास के बाद मात्र 50 की गड्डियां ही जानकारों क़ो जैसे-तैसे मिल पाती है। यह नोट शादी के दौरान वरमाला, रिवाजों और नेग-शगुन मेंदिए जाते हैं, लेकिन इस बार, बैंकों से छोटे नोट आसानी से नहीं मिल रहे हैं। ।बैंकों में 10 और 20 की गड्डियां पूरी तरह गायब है।इस स्थिति का फायदा उठाकर बाजार में नोटों की कालाबाजारी बढ़ गई है। 10, 20 और 50 रुपये के नए नोटों की गड्डियों के लिए लोग बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन नई करेंसी की उपलब्धता बेहद सीमित है। दुकानदार और बिचौलियेइन गड्डियों को 300 से 500 रुपये प्रति गड्डी के अतिरिक्त लाभ पर बेच रहे हैं बैंकों में नई करेंसी की कमी के चलते शादी और त्योहारों के लिए छोटे नोटों की मांग पूरी नहीं हो पा रहीहै। इस संबंध में जब बैंकअधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में नई करेंसी नहीं मिल रही। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बैंकों के पास पर्याप्त करेंसी नहीं है, तो बाजार में दुकानदारों के पास नई गड्डियां कहा से आ रही हैं दुकानदार नई नोटों से मालाएं बना रहे हैं। और मुनाफा कमा रहे है! अगर ग्राहक माला की जगह नई गड्डी लेता है, तो उसे 500 रुपये मुनाफे के साथ दी जा रही है कुछ लोग शादी के सीजन में बैंकों से छोटे नोटों की भारी निकासी करते हैं। यह निकासी अक्सर विशेष संपर्क या कर्मचारियों की मिलीभगत से होती है। 10 रुपये की गड्डी जिसकी वास्तविक कीमत 1000 रुपयेहै, बाजार में 1600 /- रुपये तक बिक रही हैं। 20 और 50 रुपये की गड्डियां 2500 से 5500 रुपये तक के भाव में मिल रही हैं। घंटाघर स्थित सरदार जी का कहना है हम नये नोट बाहर से मंगा रहेऔर नोटों की कमी के चलते, ग्राहक मजबूरी में ऊंचे दाम चुकाने को तैयार हैं।उनके पडोसी दुकानदार का कहना है कि हम बाहर से नए नोट मंगवा रहे हैं। छोटे नोट की मांग अधिक है लेकिन यह कम मिल रहे हैं, जिस कारण 50, 100, 200 व 500 के नए नोटों की माला बना रहे हैं छोटे नोट की माला पर 300/- रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि बड़ी नोट की माला में 150 से 200 रुपये लिए जाते हैं, जो हमारी बनाई के है। लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल बैंकों और कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों की मिली भगत से चल रहा है। बैंक अधिकारी नई करेंसी की गड्डियां सीधे दुकानदारों को बेच रहे जिससे सामान्य जनता को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। नई करेंसी की कालाबाजारी ने न केवल आम जनता को परेशानी में डाल दिया है, बल्कि बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को इस समस्या का जल्द समाधान निकाल कर लोगों को राहत देनी चाहिए। ( दस के नोट की गद्दी 1600/- की तो बीस के नोट की 2500/-की )
