मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र में काली नदी के किनारे कथित तौर पर दिन ढलते ही अवैध खनन का कारोबार शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात होते ही मिट्टी से भरे भारी डंपर खुलेआम मेरठ-गढ़ रोड पर दौड़ते हैं, जबकि प्रशासन की ओर से नो-एंट्री (नो ज़ोन) में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने का दावा किया जाता है।
आरोप है कि मेरठ के एसएसपी, एसपी ट्रैफिक, खनन विभाग और भावनपुर थाना पुलिस के दावों के बावजूद मिट्टी से लदे डंपर बिना किसी रोक-टोक के सड़कों पर चलते दिखाई देते हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और इन्हें संरक्षण कौन दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध खनन को लेकर पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। किसान नेताओं पर हमले, पत्रकारों को धमकी देने, कथित तौर पर अगवा कर मारपीट करने और टोल प्लाजा कर्मचारियों के साथ मारपीट जैसी घटनाओं के आरोप भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद अवैध खनन और डंपरों की आवाजाही पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है।
मेरठ-गढ़ रोड की सड़कों को भारी डंपरों से नुकसान पहुंचने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। कांवड़ यात्रा से पहले सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है, लेकिन यदि भारी मिट्टी के डंपर इसी तरह चलते रहे तो नई बनी सड़कें भी जल्द ही फिर से गड्ढों में तब्दील हो सकती हैं। इससे कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन और खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश रहा है कि अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में मेरठ में सामने आ रहे ये आरोप स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन और नो-एंट्री में चल रहे भारी वाहनों पर कार्रवाई करेगा, या फिर खनन माफिया इसी तरह बेखौफ होकर नियमों को चुनौती देते रहेंगे?
